सागर लोकसभा क्षेत्र में मोदी की गारंटी प्रभाव रहित, जबरदस्ती प्रत्याशी थोपे जाने के आरोप, भाजपा-कांग्रेस टक्कर के चौंका सकते है नतीजे

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Shailendra Singh
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हमारे भारत देश के 543 निर्वाचन क्षेत्रों 10 लाख से अधिक बूथों 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में 96 करोड़ से अधिक मतदाताओं के बीच भारतीय जनता पार्टी नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ रही है। 17 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ यह विश्व का सबसे बड़ा राजनैतिक दल माना गया है। जो सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के सूत्र पर काम कर रहे हैं।

इस बार सागर लोकसभा सीट में सदस्य या स्वयंसेवक के रूप में शामिल पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के सामने बड़ी उलझन है। जहां भाजपा कांग्रेस की नीतियों से अधिक आक्रामक और राष्ट्रवादी मानी जाती है। भाजपा से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों की माने तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिन्दू परिषद इस लोकसभा सीट को लेकर बेहद चिंतित हैं। जिसका कारण इस लोकसभा सीट की बीजेपी उम्मीदवार डॉ लता वानखेड़े को माना जा रह है। साथ ही भाजपा के अन्य सहयोगियों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और भारतीय किसान संघ ने इसको लेकर हाईकमान को अवगत कराया है।

भाजपा संगठन ठीक रूप से श्रेणीबद्ध होकर काम करने के लिए माना जाता है। जिसके परिवर्तनीय मात्रा में सागर में वरिष्ठ नेता मौजूद हैं।

सागर लोकसभा सीट को लेकर भाजपा पार्टी में हुई अंतर्कलह को लेकर पार्टी आलाकमान चिंतित है। साथ मे प्रत्याशी की निष्क्रियता और ग्रामीण इलाकों में भारतीय जनता पार्टी के प्रति नाराजगी और परेशानी का सबब बनी हुई है। बीजेपी उम्मीदवार डॉ लता वानखेड़े की निर्भरता मोदी पर जाकर शुरू और खत्म होकर रह गई है। प्रत्याशी चयन के निर्णय के बाद से लेकर अब तक हाईकमान पर इसको लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। इस दौड़ में शामिल रहे दमदार चेहरे 2024 चुनावों से खुद को अलग किए हुए हैं। बीजेपी पार्टी संगठन सर्वोपरि मानकर चुनाव लड़ती है। ऐसे में सागर लोकसभा प्रत्याशी का कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से सही से तालमेल न बन पाने से कांग्रेस उम्मीदवार गुड्डू राजा बुंदेला को फायदा पहुंचता दिख रहा है।

कांग्रेस प्रत्याशी ल खुद को बुंदेलखंड के बेटा बता रहे हैं। जातिगत समीकरण को देखें तो उन्हें क्षत्रिय समाज और बुंदेलखंड से जुड़े होने का अच्छा सहयोग मिलता दिख रहा है। दूसरी तरफ वानखेड़े को महाराष्ट्र का होना मानकर कुर्मी क्षत्रिय समाज उनसे दूरी बनाकर रख रहे हैं।

भाजपा के अन्य सहायक अल्पसंख्यक मोर्चा इस बार सागर लोस में वोट को लेकर अपनी असमर्थता जता चुका है। एक तरफ लोकल के कांग्रेस समर्थक और वोटर उम्मीदवार को जिताने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ सागर और दमोह में हुई प्रधानमंत्री की सभा के दौरान जुटी भीड़ ने मोदी को यहां से निराश करके भेजा है। शायद यह वह कारण है जहां अमित शाह को कहना पड़ा कि इस बार विधानसभा वार वोट प्रतिशत और क्षेत्र से जीत वहाँ के विधायक और मंत्री का कद निर्धारित करेंगे।

बीजेपी मोदी की गारंटी पर 400 सीट पार की जो बात कह रही है वो माहौल देखकर स्पष्ट तौर पर ख्वाब देखना जैसा लग रहा है। प्रचार-प्रसार को लेकर बात करें तो सागर लोकसभा क्षेत्र से जुड़े गांव, कस्बों और शहरी क्षेत्रों में आपको बुंदेला और कांग्रेस के दीवारों पर पंपलेट, लेखन और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सक्रियता स्प्ष्ट दिख दिख रही। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी उम्मीदवार की सक्रियता इन जगहों पर दूर-दूर तक नजर नही आ रही है। कम मतदान में सीधा फायदा विपक्षी दल को होता है यह इसके पहले मतदान के बाद के परिणाम से सिद्ध होता आया है। जो बीजेपी का गढ़ कही जाती है, अभी तक के जो रुझान निकलकर सामने रहे हैं उसे देखकर सागर लोस से भाजपा-कांग्रेस टक्कर के चौंकाने वाले नतीजे सामने आ सकते हैं।

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