पचास साल से ज्यादा पुरानी पत्रकारों की बैठकगाह पर दीवार की तैयारी, सवाल पूछने वालों से बचने की ‘सरकारी दूरी’ पक्की की जा रही है

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Shailendra Singh
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सागर की पुरानी कलेक्ट्रेट, जो अब एसडीएम कार्यालय के रूप में उपयोग हो रही है, उसी परिसर में एक ऐसी जगह है जहाँ रोज़ाना पत्रकार जिले की राजनीति, प्रशासन और सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। यह जगह लंबे समय से पत्रकारों के नियमित संवाद और सूचनाओं के आदान-प्रदान का सक्रिय केंद्र रही है।

लेकिन अब कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम कार्यालय ने इसी स्थान पर दीवार खड़ी करने का काम शुरू कर दिया है। पत्रकार इसे उनकी बैठक और संवाद को बाधित करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि यह वही जगह है जहाँ वे अभी भी रोज़ाना जुटते हैं।

सागर जिले में यह घटना नई नहीं है। पिछले कुछ समय से पत्रकारों को कई तरह की दिक्कतों और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज़्यादा चिंता की बात यह है कि जिले के भाजपा विधायक और मंत्री इस स्थिति पर न तो आपत्ति जताते हैं और न ही कोई ठोस हस्तक्षेप करते हैं।
मदद के नाम पर केवल सांत्वना और आश्वासन मिलता है।

पत्रकारों का कहना है कि जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना अब स्थानीय प्रशासन को असुविधाजनक लगने लगा है, और उसी असुविधा का नतीजा यह दीवार बन रही है। जहां रोज़ संवाद होता है, वहीं दीवार उठाने का फैसला यह संकेत देता है कि सिस्टम खुली बातचीत के बजाय दूरी बनाकर काम करना चाहता है।

 

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