मुकेश जैन ढाना की दावेदारी भयंकर बम की गूंज न होकर फुलझड़ी की लड़ी जैसी सुलग कर शांत हो जाया करती है

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Shailendra Singh
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मुकेश जैन ढाना की दावेदारी भयंकर बम की गूंज न होकर फुलझड़ी की लड़ी जैसी सुलग कर शांत हो जाया करती है

मध्यप्रदेश में जैसे ही चुनावी दस्तक होती है सागर विधानसभा से एक चेहरा सबसे पहले अपनी दावेदारी के लिए आगे आ जाता है। वो बात अलग है कि इन्हें भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने कभी गम्भीरता से नही लिया है। 2023 में ये हर बार की तरह फिर सक्रिय नजर आए। मुकेश ने इस बार फ्लेक्स के जरिए अपनी दावेदारी का आगाज किया। सागर शहर में उन जगहों को चुना गया जहां फ्लेक्स लगवाने के रेट सबसे कम और बाजिब रहते हैं। विधायक शैलेन्द्र जैन से मुकेश की दावेदारी को लेकर प्रश्न करने पर वो बगैर कुछ कहे एक हल्की मुस्कान छोड़कर विषयांतर हो जाते हैं। हर बार की तरह खाली हाथ खड़े इस उम्मीदवार ने फिर आक्रामक रुख अपनाया है। पार्टी एक छोटे बच्चे की तरह इनके मचलने को लेकर नटखट क्रीड़ा जैसे समझकर कुछ दिन खामोश रहती है। बीच -बीच मे कार्यकर्ताओं द्वारा मान -मनौअल का दौर चलता है। सबको ज्ञात है ये फिर निर्दलीय या किसी दल से चुनाव लड़ने का एलान करेंगे। जब लगता है कि इन्हें सही से समझाने का वक्त आ गया है ऊपर से एक बरिष्ठ नेता की एंट्री होती है। 2018 में पार्टी से बगावती स्वर की सुलह विधानसभा चुनावों में फार्म निकाल लेने पर समाप्त हो गई थी। कयास लगाए जाने लगे हैं 2023 के चुनावी रण में इनके बागी तेवर की समय सीमा कुछ शर्तों पर टिकी रहेगी वो जैसे ही पूरी हो जाएगी मुकेश जैन ढाना पहले की तरह फिर भाजपा के संक्रिय सदस्य बनकर पार्टी का प्रचार करते नजर आने लगेंगे।

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