Home Blog

सागर-रहली क्षेत्रवासियों के लिए राहत की खबर, बम्होरी बीका ओवरब्रिज की बाधा 10 दिन के भीतर होगी दूर

i

सागर-रहली-जबलपुर मार्ग से जुड़े हजारों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। बम्होरी बीका ग्राम पंचायत क्षेत्र में नेशनल हाईवे-44 पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज की सर्विस रोड के बीच आ रही भूमि संबंधी बाधा को दूर करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। अधिकारियों के अनुसार आगामी लगभग 10 दिनों के भीतर नियमानुसार भू-अर्जन की कार्रवाई आगे बढ़ने के बाद रास्ते में आ रहे मकानों और भूमि का निस्तारण किया जाएगा, जिससे लंबे समय से प्रभावित निर्माण कार्य को गति मिल सकेगी।

जानकारी के अनुसार नवागत सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देशन में इस प्रकरण ने तेजी पकड़ी है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में एसडीएम अमन मिश्रा, तहसीलदार रोहित गौड़ और बम्होरी बीका के पटवारी अरविंद सिंह लोधी ने भू-अर्जन से संबंधित आवश्यक राजस्व एवं प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूर्ण कर रिपोर्ट एनएचएआई के दिल्ली मुख्यालय को भेज दी है।

गौरतलब है कि सर्विस रोड के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पाने के कारण यह मामला लंबे समय तक लंबित रहा। इसी वजह से ओवरब्रिज निर्माण के बीच निजी भूमि और मकानों का मुद्दा सामने आया तथा निर्माण कार्य प्रभावित हुआ। अब संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक दस्तावेजी एवं राजस्व कार्रवाई पूरी किए जाने के बाद समाधान का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है।

यह राहत केवल बम्होरी बीका तक सीमित नहीं है। सागर-रहली मार्ग से नरयावली, रहली और सुरखी विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली तहसीलें, कस्बे और सैकड़ों गांव जुड़े हुए हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, व्यापारी, विद्यार्थी और यात्री इस मार्ग का उपयोग करते हैं। ऐसे में निर्माण कार्य में तेजी आने से पूरे क्षेत्र को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद न केवल आवागमन की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा, बल्कि ओवरब्रिज परियोजना को भी नई गति मिलेगी। इससे सागर-रहली मार्ग पर यातायात अधिक सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित हो सकेगा तथा क्षेत्रीय विकास को भी बल मिलेगा।

कटरबाजी, चाकूबाजी और बढ़ता भय.. नशा, अपराध और बेरोजगारी बने सागर के सबसे बड़े सवाल

 

सागर नगर के सामने सबसे बड़ी चुनौती..बढ़ता अपराध और भय का माहौल है। यदि आज सागर नगर के लोगों से पूछा जाए कि शहर की सबसे बड़ी समस्या क्या है, तो बड़ी संख्या में लोग बेरोजगारी, महंगाई या राजनीति से पहले बढ़ते अपराध का नाम लेंगे।

शहर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जिस तेजी से चाकूबाजी, कटरबाजी, मारपीट, लूटपाट, नशे से जुड़े अपराध और युवाओं के बीच हिंसक घटनाएं बढ़ी हैं, उसने आम नागरिकों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। हालात यह हैं कि लगभग हर सप्ताह किसी न किसी इलाके से धारदार हथियारों के इस्तेमाल, गैंगनुमा झगड़ों या नशे से जुड़ी घटनाओं की खबर सामने आ जाती है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि अपराध अब किसी विशेष क्षेत्र तक सीमित नहीं दिखाई देते। बाजार, कॉलोनियां, सार्वजनिक स्थान और मुख्य सड़कें भी ऐसी घटनाओं से अछूती नहीं रहीं। शहर का आम नागरिक अब यह महसूस करने लगा है कि अपराधियों के भीतर कानून का भय पहले जैसा नहीं रहा।
लेकिन क्या यह केवल कानून-व्यवस्था का विषय है?
यहीं से एक बड़ा सवाल खड़ा होता है।

सागर नगर की एक पूरी पीढ़ी आज रोजगार, व्यवसाय और भविष्य की अनिश्चितताओं से जूझ रही है। हजारों शिक्षित युवा प्रतियोगी परीक्षाओं और सीमित अवसरों के बीच संघर्ष कर रहे हैं। दूसरी ओर व्यापार के क्षेत्र में भी नए लोगों के लिए अपनी जगह बनाना आसान नहीं माना जाता। पूंजी, संपर्क, बाजार नेटवर्क और स्थापित कारोबारियों के बीच प्रतिस्पर्धा में अनेक छोटे प्रयास शुरुआती दौर में ही दम तोड़ देते हैं।

ऐसे में जब बड़ी संख्या में युवाओं को न स्थायी रोजगार मिलता है, न आर्थिक स्थिरता और न ही भविष्य की स्पष्ट दिशा, तब सामाजिक निराशा बढ़ना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि कई सामाजिक जानकार बढ़ते अपराध को केवल पुलिस या प्रशासन की चुनौती नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक चुनौती भी मानते हैं।

शहर में नशे के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी लगातार चिंताएं सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर अक्सर यह चर्चा होती है कि बेरोजगारी, खाली समय, गलत संगत और आसान पैसे की चाहत कुछ युवाओं को अपराध की दुनिया की ओर धकेल रही है। हालांकि अपराध का रास्ता चुनना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन अपराध के पीछे मौजूद सामाजिक कारणों पर चर्चा होना भी जरूरी है।

आज सागर नगर एक ऐसे मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है जहां केवल अपराधियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त समाधान नहीं हो सकती। सवाल यह भी है कि क्या शहर अपनी नई पीढ़ी को पर्याप्त अवसर दे पा रहा है? क्या युवाओं को रोजगार, कौशल विकास और आर्थिक भागीदारी के पर्याप्त रास्ते उपलब्ध हैं? क्या नशे और अपराध के बढ़ते नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण हो पा रहा है?
क्योंकि इतिहास गवाह है कि जब किसी शहर में अवसरों की कमी और असंतोष बढ़ता है, तो उसका असर केवल अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ता, बल्कि सड़कों, बाजारों और सामाजिक माहौल में भी दिखाई देने लगता है।

सागर नगर के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती केवल अपराधियों पर कार्रवाई नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों को समझना और बदलना भी है, जो अपराध को जन्म देने वाली जमीन तैयार करती हैं। यदि समय रहते इस दिशा में गंभीर प्रयास नहीं हुए, तो बढ़ता भय और असुरक्षा आने वाले वर्षों में शहर की सबसे बड़ी पहचान बन सकते हैं।

सागर के ‘शैलेंद्र’ का भोपाल में बढ़ा सियासी कद, जानिए कितनी ताकतवर है ‘सदस्य सुविधा समिति’ जिसकी कमान जैन को मिली..कैबिनेट मंत्री जैसा रहेगा रसूख!

भोपाल/सागर। सागर विधानसभा क्षेत्र से लगातार चौथी बार भारतीय जनता पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ विधायक शैलेंद्र कुमार जैन को मध्य प्रदेश विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति का सभापति (Chairman) नियुक्त किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा की गई यह नियुक्ति प्रदेश की राजनीति और बुंदेलखंड अंचल के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 

पद का कार्यक्षेत्र और अधिकार (ताकत)

 

‘सदस्य सुविधा समिति’ विधानसभा की एक बेहद प्रभावशाली आंतरिक समिति होती है। इसका सीधा संबंध प्रदेश के सभी (सत्तापक्ष और विपक्ष) विधायकों के विशेषाधिकारों और सुविधाओं से होता है

 

विधायकों की सुविधाओं की निगरानी..

 यह समिति राज्य के सभी सदस्यों (विधायकों) को मिलने वाले आवास, भोजन, चिकित्सा सहायता, और अन्य दैनिक भत्तों व सुविधाओं की निगरानी करती है।

 

प्रोटोकॉल और प्रशासनिक अधिकार..

शासकीय दौरों के दौरान विधायकों को मिलने वाले सरकारी प्रोटोकॉल, उनके निर्वाचन क्षेत्रों में अतिरिक्त लिपिकीय, स्टाफ की व्यवस्था और कार्यालय भवनों की मंजूरी में इस समिति की अनुशंसा सबसे महत्वपूर्ण होती है।

 

वित्तीय और ऋण संबंधी नीतियां..

विधायकों को वाहन या आवास खरीदने के लिए मिलने वाले ऋण पर ब्याज अनुदान (Interest Subsidy) जैसे वित्तीय मामलों की समीक्षा करना और उसे मुख्यमंत्री व वित्त विभाग से मंजूर करवाना इस समिति के दायरे में आता है।

 

सीधा शासन से समन्वय..

इस समिति के अंतिम आदेश और अनुशंसाएं सभापति के स्तर से जारी होते हैं। समिति सीधे मुख्यमंत्री सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) और वित्त विभाग के साथ बैठकें कर नीतियों पर निर्णय लेती है।

 

प्रदेश की राजनीति में भूमिका और बढ़ता महत्व..

शैलेंद्र जैन को यह जिम्मेदारी मिलने से मध्य प्रदेश की सियासत में उनके प्रभाव और राजनीतिक कद में बड़ा बदलाव आएगा।

सर्वदलीय समन्वय के केंद्र बिंदु..

इस पद पर रहते हुए शैलेंद्र जैन सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस और अन्य दलों के विधायकों की समस्याओं और मांगों के निवारण का जरिया बनेंगे। इससे पूरी विधानसभा में उनकी सर्वस्वीकार्यता और संपर्क का दायरा बढ़ेगा।

 

मंत्रिमंडल स्तर का प्रभाव..

हालांकि यह सीधा प्रशासनिक मंत्रालय नहीं है, लेकिन सभी विधायकों के हितों से जुड़े होने के कारण इस समिति के सभापति का वजन सरकार के भीतर किसी कैबिनेट मंत्री से कम नहीं आंका जाता। सरकार को समिति की सिफारिशों पर गंभीरता से विचार करना होता है।

 

बुंदेलखंड और सागर का सियासी वजन..

सागर जिले में विकास कार्यों (जैसे सागर मेडिकल कॉलेज और बाईपास निर्माण) को लेकर वे पहले से सक्रिय हैं। अब इस बड़े संगठनात्मक व विधायी पद के मिलने से भोपाल मुख्यालय पर उनकी पकड़ और मजबूत होगी, जिससे वे अपने क्षेत्र की मांगों को और अधिक वजन के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने रख सकेंगे।

 

वरिष्ठता को मिला सम्मान..

लगातार चार बार चुनाव जीतने के बाद भी वे मंत्रिमंडल की रेस से बाहर थे, लेकिन विधानसभा की इस महत्वपूर्ण समिति की कमान सौंपकर भाजपा नेतृत्व ने उनकी वरिष्ठता और सांगठनिक अनुभव को बड़ा सम्मान दिया है।

 

सागर में ‘ड्रग-बस्टर’ IPS अनुराग सुजानिया की तैनाती, कटरबाजों और नशा नेटवर्क पर सख्ती की चुनौती

सुरखी से शुरू हुआ करियर, 12 साल बाद जिले की कमान.. शहर में कटरबाजों का खौफ, गांव में रंजिश और माफिया गतिविधियां बनी चुनौती

 

सागर जिले में 3 मई 2026 की रात एक अहम प्रशासनिक बदलाव हुआ, जब मध्यप्रदेश सरकार ने 2014 बैच के तेज तर्रार IPS अधिकारी अनुराग सुजानिया को जिले का नया पुलिस अधीक्षक (SP) नियुक्त किया। यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इन्होंने अपने करियर की शुरुआत इसी जिले के सुरखी थाने में बतौर प्रशिक्षु अधिकारी की थी और अब करीब 12 वर्षों बाद वे जिले की कमान संभालने लौटे हैं।

 

जिले में वर्तमान कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए नए SP के सामने कई प्रमुख चुनौतियां हैं। शहर में ‘कटरबाज’ घटनाएं चिंता का कारण बनी हुई हैं। मोतीनगर, कोतवाली और मकरोनिया क्षेत्रों में छोटी-छोटी बातों पर चाकू और कटर से हमले की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कई लोग घायल हुए हैं और कुछ मामलों में जान भी गई है।

 

इन घटनाओं के पीछे नशे के बढ़ते प्रभाव को एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। नाइट्रावेट, टेन प्लस जैसी दवाओं के दुरुपयोग के साथ-साथ गांजा और सेल्युशन जैसे नशीले पदार्थों का सेवन बढ़ रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी सामने आया है कि इन वारदातों में नाबालिगों की संलिप्तता के मामले बढ़े हैं।

कटरबाज घटनाओं के अलावा जिले के अन्य हिस्सों में भी कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। शहर के कैंट और सदर जैसे क्षेत्रों में सांप्रदायिक संवेदनशीलता को लेकर सतर्कता जरूरी है, वहीं ग्रामीण इलाकों में पुरानी रंजिश के चलते जघन्य अपराधों की घटनाएं सामने आती रही हैं। बिजली गांव जैसे क्षेत्रों में गंभीर मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की आवश्यकता बनी रहती है।

इसके साथ ही जिले में रेत और शराब से जुड़े अवैध कारोबार भी प्रशासन के लिए चुनौती बने हुए हैं। इन नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना पुलिस प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

 

अनुराग सुजानिया (IPS) इससे पहले विभिन्न जिलों में पदस्थ रह चुके हैं। उनके पिछले कार्यकाल में नशा संबंधित मामलों में कार्रवाई, जिसमें बड़ी मात्रा में अफीम जब्ती जैसे प्रकरण शामिल हैं, के कारण उन्हें सख्त पुलिसिंग के लिए जाना जाता है। हालांकि, सागर में उनकी कार्यशैली और रणनीति का प्रभाव आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

 

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिले में बढ़ती हिंसक घटनाओं, नशे के प्रसार और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता है। ऐसे में नए पुलिस अधीक्षक की प्राथमिकताओं और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सभी की नजर रहेगी।

 

कौन हैं अनुराग सुजानिया?

-2014 बैच के IPS अधिकारी

-विभिन्न जिलों में पदस्थ रह चुके

-नशा मामलों में कार्रवाई और बड़े नेटवर्क पर काम का अनुभव

-सख्त और अनुशासित पुलिसिंग के लिए पहचान

 

मुख्य चुनौतियां ..

-कटरबाज घटनाओं पर नियंत्रण

-नशे के नेटवर्क और सप्लाई चेन पर कार्रवाई

-नाबालिगों की बढ़ती आपराधिक संलिप्तता

-सांप्रदायिक संवेदनशील क्षेत्रों में शांति बनाए रखना

-ग्रामीण रंजिश और जघन्य अपराध

-रेत और शराब माफिया पर नियंत्रण

 

सागर जिले में कानून-व्यवस्था की बहुआयामी चुनौतियों के बीच नए SP की तैनाती को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि पुलिस प्रशासन कटरबाज घटनाओं, नशे के नेटवर्क और अवैध कारोबार पर किस हद तक नियंत्रण स्थापित कर पाता है।

वायरल वीडियो कर ‘दिखावा’ या हकीकत से दूरी? सागर के बड़ा बाजार में जनता रोज संभालती ट्रैफिक, विधायक शैलेन्द्र जैन अब भी क्यों नहीं समझ पाए इसका मर्म!

 

सागर का बड़ा बाजार.. जनता की व्यवस्था पर सवाल या विधायक शैलेन्द्र जैन की अनदेखी?

 

सागर के बड़ा बाजार क्षेत्र का एक वीडियो वायरल है, जिसमें विधायक शैलेन्द्र जैन ट्रैफिक संभालते नजर आते हैं। लेकिन यह दृश्य जितना सतही तौर पर सराहनीय दिखता है, उतना ही गहरा सवाल भी खड़ा करता है क्या चार बार से विधायक रहे शैलेन्द्र जैन अब तक अपने ही क्षेत्र की जनता के मर्म और उनकी असाधारण क्षमता को नहीं समझ पाए?

 

बड़ा बाजार सागर की सबसे पहली बसाहटों में से एक है। संकरी सड़कें, बढ़ता ट्रैफिक दबाव और वर्षों पुरानी समस्या ये सब कोई नई बात नहीं है। लेकिन इतने समय में इस समस्या से स्थायी निजात दिलाने के लिए कोई बड़ा और ठोस बदलाव नजर नहीं आता। अगर व्यवस्था मजबूत होती, तो क्या यहां रोज सैकड़ों बार जाम की स्थिति बनती?

 

जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। यहां का ट्रैफिक किसी सरकारी सिस्टम से ज्यादा, जनता के अनुभव और आपसी तालमेल से चलता है। बड़ा बाजार क्षेत्र और यहां से गुजरने वाले राहगीर खुद इस पूरे रास्ते का ट्रैफिक संभालते हैं। कई बार ट्रैफिक पुलिस भी इन्हीं के सहयोग से जाम खुलवा पाती है क्योंकि हर जगह एक साथ संभालना संभव नहीं होता।

यहां एक संगठित “चेन सिस्टम” काम करता है। जैसे ही जाम लगता है, लोगों को अपने-आप समझ आ जाता है कि क्या करना है। बिना किसी निर्देश के सब अपनी भूमिका निभाने लगते हैं।

 

जब मुख्य सड़क पर जाम बढ़ता है और रास्ता बंद होने लगता है, तो सड़क के किनारे मोहल्लों के रास्ते सक्रिय हो जाते हैं। टू-व्हीलर वाहन इन रास्तों से निकलकर मुख्य मार्ग का दबाव कम करते हैं। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि टू-व्हीलर लगातार चलते रहें, इसलिए लोग रास्ता बनाते रहते हैं।

 

वहीं, फोर-व्हीलर वाहन अगर जाम का कारण बनते हैं, तो उन्हें इस तरह रोका जाता है कि वे अपनी लेन बनाए रखें और छोटे वाहन निकलते रहें। यह सब बिना किसी औपचारिक आदेश के, सिर्फ समझ और अनुभव के आधार पर होता है।

 

ऐसे में जो टू-व्हीलर चालक “रॉन्ग साइड” जाता दिखता है, वह अव्यवस्था नहीं, बल्कि इसी स्थानीय सिस्टम का हिस्सा होता है। उसे पता होता है कि अगर वह रुक गया तो जाम और बढ़ेगा इसलिए वह जहां जगह मिले, आगे बढ़ता रहता है, ताकि ट्रैफिक का प्रवाह बना रहे।

 

सोचिए, अगर यहां के लोग यह सब खुद से संभालने में सक्षम न होते तो क्या होता? सागर का यह सबसे व्यस्त इलाका पूरी तरह ठप हो जाता। लेकिन ऐसा नहीं होता, क्योंकि यहां की जनता ने समस्या को अपना भाग्य मानकर सिर्फ सहा नहीं, बल्कि हर दिन उससे लड़ना और उसे संभालना सीख लिया है।

 

यही वह काबिलियत है, यही वह जमीनी समझ है, जिसे पहचानने की जरूरत है। लेकिन सवाल यही है, क्या विधायक शैलेन्द्र जैन इस सच्चाई को समझ पा रहे हैं? क्या वे उस जनता की इस अनकही मेहनत और व्यवस्था को देख पा रहे हैं, जो बिना किसी श्रेय के शहर को रोज चलाती है?

 

वायरल वीडियो एक पल दिखाता है, लेकिन बड़ा बाजार की सच्चाई हर दिन लिखी जाती है, जनता के धैर्य, समझ और संघर्ष से। सवाल यह नहीं है कि उस दिन ट्रैफिक किसने संभाला, सवाल यह है कि इतने वर्षों में इस समस्या से स्थायी राहत दिलाने की दिशा में क्या किया गया?

 

सागर का बड़ा बाजार आज भी चल रहा है, किसी व्यवस्था के भरोसे नहीं, बल्कि उस जनता के भरोसे, जिसने अव्यवस्था में भी रास्ता बनाना सीख लिया है।

देवरी में विनीत पटेरिया का बढ़ता प्रभाव बना टकराव की वजह! विधायक बृजबिहारी पटेरिया की बेटी पर समर्थक की पिटाई का आरोप, BJP में सियासी संग्राम

सागर की देवरी विधानसभा में अब असली लड़ाई किसकी है यह सवाल एक बार फिर जोर पकड़ रहा है। जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि विनीत पटैरिया का बढ़ता कद अब खुलकर विवाद की वजह बनता नजर आ रहा है। उनके खास समर्थक के साथ हुई मारपीट ने पूरे इलाके की सियासत में भूचाल ला दिया है।

 

गौरझामर मुख्य बाजार में जिस युवक के साथ सरेआम मारपीट हुई, वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि विनीत पटैरिया का करीबी समर्थक बताया जा रहा है। आरोप है कि BJP विधायक बृजबिहारी पटेरिया की बेटी ने उसे बैंक के बाहर बुलाकर जूतों से पीटा और यह पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हो गई।

लेकिन इस पूरी घटना के पीछे असली कहानी है विनीत पटैरिया का बढ़ता राजनीतिक प्रभाव, जो अब सीधे टकराव की वजह बन चुका है।

 

कौन हैं विनीत पटैरिया?

देवरी विधानसभा में विनीत पटैरिया का नाम तेजी से उभरता हुआ सियासी चेहरा माना जाता है।

वर्तमान में जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि

उनकी पत्नी देवरी जनपद अध्यक्ष

क्षेत्र में मजबूत जनाधार और सक्रिय पकड़

सूत्रों के मुताबिक, इलाके में उनकी लोकप्रियता मौजूदा विधायक से भी ज्यादा मानी जा रही है, और यही वजह है कि उन्हें भविष्य में BJP का संभावित उम्मीदवार भी देखा जा रहा है।

 

यहीं से शुरू हुआ टकराव:

चुनाव के बाद से ही विधायक बृजबिहारी पटेरिया और उनके भतीजे विनीत पटैरिया के बीच वर्चस्व की लड़ाई लगातार गहराती जा रही है।

 

पहले विधायक की बेटी ने अपने चचेरे भाई विनीत पटैरिया के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई और अब उनके समर्थकों तक यह विवाद पहुंच गया है।

 

समर्थक बना निशाना?

जिस युवक के साथ मारपीट हुई, उसे विनीत पटैरिया का खास माना जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है, क्या यह हमला सीधे तौर पर विनीत पटैरिया की ताकत को चुनौती देने की कोशिश है?

 

सियासत का असली खेल:

देवरी विधानसभा में अब मुकाबला सिर्फ विपक्ष से नहीं, बल्कि BJP के भीतर ही ताकत के प्रदर्शन का बन चुका है।

एक तरफ मौजूदा विधायक का परिवार, तो दूसरी तरफ तेजी से उभरते चेहरे.. विनीत पटैरिया।

 

बड़ा सवाल:

क्या विनीत पटैरिया की बढ़ती लोकप्रियता ही इस पूरे विवाद की जड़ है?

क्या देवरी में अगला टिकट तय होने से पहले ही सियासी जंग सड़कों पर आ गई है?

यह मामला अब सिर्फ मारपीट नहीं, बल्कि देवरी की सत्ता की अगली लड़ाई का ट्रेलर माना जा रहा है

लकड़ी परमिशन के बदले घूस: रेंजर और क्लर्क 50 हजार लेते रंगे हाथ ट्रैप

सागर जिले के बंडा उत्तर वनमंडल में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। यहां लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रेंजर विकास सेठ और क्लर्क जयप्रकाश तिवारी को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों ट्रैप किया है।
 21 लाख की लकड़ी परमिशन के बदले मांगी रिश्वत
जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता विजय सिंह राजपूत (बाबा ब्यालई) से करीब 21 लाख रुपये की लकड़ी की परमिशन देने के एवज में 1 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी।
पहले ही ले चुके थे 40 हजार
शिकायतकर्ता आरोपियों को पहले ही 40 हजार रुपये दे चुका था, जिसके बाद बाकी रकम देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
लोकायुक्त की कार्रवाई
शिकायत के बाद लोकायुक्त पुलिस ने जाल बिछाया और दोनों आरोपियों को 50 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
 जांच जारी

फिलहाल लोकायुक्त टीम मामले की आगे जांच कर रही है और दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

अमेरिका-इजरायल और ईरान आमने-सामने: क्या शुरू होने वाला है महायुद्ध?

 

मिडिल ईस्ट इस समय बेहद खतरनाक दौर से गुजर रहा है और हालात तेजी से युद्ध की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। Iran ने साफ शब्दों में ऐलान कर दिया है कि वह अब किसी भी दबाव या धमकी के बीच कोई बातचीत नहीं करेगा।

ईरान का कहना है कि जब तक United States और Israel हमले और दबाव की नीति जारी रखेंगे, तब तक किसी भी तरह की वार्ता संभव नहीं है। साथ ही ईरान ने अस्थायी सीजफायर को ठुकराते हुए “स्थायी शांति” की शर्त रख दी है।

उधर, Donald Trump ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने समझौता नहीं किया, तो उसे “भारी परिणाम” भुगतने होंगे। ट्रंप ने यहां तक कहा कि मौजूदा हालात में “एक पूरी सभ्यता खत्म होने की कगार पर पहुंच सकती है।”

जमीन पर हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं ईरान भी इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमलों की तैयारी में जुटा है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ईरान ने संकेत दिए हैं कि अगर उस पर दबाव और बढ़ा, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित कर सकता है। यह रास्ता दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है, और यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक आर्थिक संकट को जन्म दे सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 7–10 दिन बेहद निर्णायक साबित होंगे। इस दौरान या तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप बढ़ेगा और हालात को नियंत्रित किया जा सकेगा, या फिर यह टकराव एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।

भारत पर असर

अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी, शेयर बाजार में गिरावट और मिडिल ईस्ट में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा चिंता का विषय बन सकती है।

 फिलहाल दुनिया एक बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ी है। दोनों पक्षों की कड़ी चेतावनियों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। अब सबकी नजरें अगले कुछ दिनों पर टिकी हैं जहां एक फैसला दुनिया को शांति की ओर ले जा सकता है या फिर एक बड़े विनाश की तरफ चला जाएगा।

सागर में शिक्षा का खेल: ‘तय दुकानों’ की मजबूरी और छात्रा से संदिग्ध व्यवहार का वीडियो वायरल

कलेक्टर के निर्देश बेअसर, प्राइवेट स्कूलों की पकड़ बरकरार, जिस दुकान पर अभिभावकों की भीड़, वहीं मालिक के व्यवहार पर उठे गंभीर सवाल

 

सागर । जमीनी पड़ताल

सागर में नए शैक्षणिक सत्र से पहले प्रशासन ने अभिभावकों को राहत देने के उद्देश्य से पुस्तक मेले का आयोजन किया। दावा किया गया कि यहां कॉपी-किताबों और स्टेशनरी पर अच्छा-खासा डिस्काउंट मिलेगा, जिससे अभिभावकों को महंगाई से राहत मिलेगी।

लेकिन जब इस व्यवस्था की जमीनी हकीकत देखी गई, तो तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आई।

 

एक तरफ मेला, दूसरी तरफ ‘तय दुकान’ पर भीड़

जहां एक ओर मेले में छूट का प्रचार हो रहा है, वहीं सिविल लाइन स्थित दीपक स्टेशनरी पर अभिभावकों की भारी भीड़ उमड़ती दिखाई दी।

दुकान के बाहर लंबी लाइनें, सड़क तक खड़े लोग, अंदर जगह नहीं, बाहर से ही सामान का वितरण, यह नजारा साफ बताता है कि असली खरीदारी वहीं हो रही है, जहां स्कूलों ने संकेत दिए हैं।

यानी, अभिभावक आज भी स्वतंत्र नहीं हैं, वे मजबूरी में “तय दुकानों” से ही खरीदारी कर रहे हैं।

 

प्राइवेट स्कूलों का दबाव?

अभिभावकों का साफ कहना है कि स्कूलों द्वारा दी गई लिस्ट में खास दुकानों का अप्रत्यक्ष दबाव होता है।

दूसरी जगह से सामान लेने पर असुविधा या अप्रत्यक्ष आपत्ति जताई जाती है। कई बार कॉपियों पर स्कूल का मोनोग्राम भी रहता है। नतीजा छूट होने के बावजूद मेला बेअसर और महंगी खरीदारी जारी है।

 

वायरल वीडियो ने बढ़ाई गंभीरता

इसी बीच, इसी स्टेशनरी से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

वीडियो में दुकान संचालक का एक छात्रा के प्रति व्यवहार सामान्य नहीं, बल्कि असहज और सवाल खड़े करने वाला नजर आता है।

वीडियो में दिखने वाले बिंदु…

छात्रा को देखने का तरीका असामान्य प्रतीत होता है

हाव-भाव और बॉडी लैंग्वेज सहज नहीं लग रही है

छात्रा के साथ नजदीकी व्यवहार को लेकर सवाल उठते हैं

यह वही जगह है, जहां रोज बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पहुंच रही हैं।

https://www.facebook.com/share/18XKpPS9xQ/

 

बड़ा सवाल: क्या बच्चे सुरक्षित हैं?

अब मामला सिर्फ महंगी किताबों तक सीमित नहीं रहा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन दुकानों से खरीदारी “अनिवार्य” कराई जा रही है, क्या वे बच्चों के लिए सुरक्षित हैं?

क्या इन दुकानों के व्यवहार और माहौल की कोई जांच होती है? क्या स्कूल सिर्फ आर्थिक पहलू देख रहे हैं?

 

कलेक्टर के निर्देश बेअसर

प्रशासन द्वारा पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि किसी एक दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा और अभिभावकों को विकल्प मिलेगा।

लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग है “तय दुकानों” पर भीड़, मेले की छूट बेअसर, और अब उसी व्यवस्था से जुड़े स्थान पर संदिग्ध व्यवहार का वीडियो सामने आना, यह सीधे-सीधे प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी को दर्शाता है।

 

अभिभावकों की दोहरी चिंता है। पहले महंगी किताबें और अनावश्यक लिस्ट, और अब बच्चों की सुरक्षा, क्या यह एक बड़ा सिस्टम फेलियर है? पूरा मामला अब तीन स्तर पर सवाल खड़े कर रहा है। शिक्षा व्यवस्था, जहां किताबें भी नियंत्रण में हैं

व्यापार व्यवस्था, जहां सीमित दुकानों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था, जहां बच्चों की गरिमा पर सवाल उठ रहे हैं।

 

प्रशासन को चाहिए कि इस वीडियो की निष्पक्ष जांच हो, संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की जाए। “तय दुकानों” की व्यवस्था की समीक्षा हो। स्कूलों की भूमिका की जांच की जाए। क्योंकि सागर में अब शिक्षा सिर्फ महंगी नही बल्कि सवालों के घेरे में है। यहां अभिभावक सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं।

 हफसिली (मोकलपुर) में आग का तांडव: सागर में फिर फेल व्यवस्था, दमकल का इंतजार करते-करते जल गई पूरी फसल

 

सागर जनपद के पटवारी हल्का नंबर 117 अंतर्गत ग्राम हफसिली (मोकलपुर) में शुक्रवार को एक किसान के खेत में भीषण आग लगने से बड़ा नुकसान हो गया।

किसान बबलू प्रसाद दुबे के खेत में लगी आग ने करीब 2 एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल को पूरी तरह जलाकर खाक कर दिया।

 

आग पर ग्रामीणों ने पाया काबू

आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते पूरे खेत को अपनी चपेट में ले लिया।

ग्रामीणों और किसानों ने तत्परता दिखाते हुए आसपास के कुओं में लगे मोटर पंपों के जरिए पानी डालकर घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। यदि समय पर प्रयास नहीं किए जाते, तो आग अन्य खेतों तक भी फैल सकती थी।

 

दमकल नहीं पहुंची समय पर

ग्रामीणों के अनुसार, आग लगने के तुरंत बाद दमकल विभाग को लगातार फोन किए गए, लेकिन मौके पर समय पर कोई राहत नहीं पहुंच सकी।

बताया गया कि बाद में बीजेपी से जुड़े स्थानीय नेताओं के हस्तक्षेप के बाद सुरखी नगर परिषद से अग्निशमन वाहन रवाना हुआ, लेकिन तब तक आग पर ग्रामीण स्वयं काबू पा चुके थे।

 

किसान को बड़ा आर्थिक झटका

इस आगजनी में किसान की पूरी फसल नष्ट हो गई, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक, किसान बबलू प्रसाद दुबे की जीविका मुख्यतः इसी फसल पर निर्भर थी, ऐसे में नुकसान का असर सीधे उसके परिवार पर पड़ेगा।

 

आग लगने के कारण स्पष्ट नहीं

 

फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। आशंका जताई जा रही है कि तेज गर्मी या किसी चिंगारी के कारण आग भड़की हो सकती है।

 

 प्रशासन पर उठे सवाल

 

घटना के बाद एक बार फिर आपदा प्रबंधन और दमकल व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर दमकल पहुंचती, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। 

 

प्रभावित किसान को तत्काल मुआवजा और क्षेत्र में दमकल व्यवस्था को मजबूत किए जाने की मांग ग्रामीणों ने उठाई है।