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Home राजनीति

मोदी की गारंटी को जो समझे वो मंत्री, नही समझे वो दावेदार होकर भी बाहर हो गए

Minister who understands Modi's guarantee

Shailendra Singh by Shailendra Singh
December 26, 2023
in राजनीति, बात पते की, Follow Me Special, Madhya Pradesh
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मोदी की गारंटी को जो समझे वो मंत्री, नही समझे वो दावेदार होकर भी बाहर हो गए
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मोदी की गारंटी को जो समझे वो मंत्री, जो नही समझे वो दावेदार होकर बाहर हो गए

मध्यप्रदेश में मंत्री मंडल विस्तार को लेकर 12 दिनों से चली आ रही खींचतान पर आज दोपहर 3:30 बजे विराम लग जाएगा। इसको लेकर मीडिया संस्थानों ने सूत्रों के जरिए अपने-अपने आंकलन सामने रखे हैं। इसको समझना तब बेहद आसान है।जब आपकी सटीकता “मोदी” को ध्यान में रखकर की गई है। उससे ऊपर या नीचे जाकर लगाए सारे अनुमान गलत ही साबित होंगे। आइये इसे समझते हैं। “भारतीय जनता पार्टी यानी मोदी” इसको सीधा समझें तो पार्टी किसी भी प्रकार की बगावत बर्दास्त नही करने वाली है। आपको मोदी से जुड़ी भविष्य की योजना को लेकर लोगो के भिन्न-भिन्न मत देखने को मिलेंगे। इसे तानाशाहीपूर्ण रवैया के तौर पर लोगो के मत देखने को मिल जाएंगे। इस तरह का संदेश देकर मोदी बीजेपी और संगठन की भविष्य की नींव को मजबूती देकर मानना चलते हैं। जहां पार्टी में किसी भी प्रकार की फुट होने का संदेश बाहर निकलकर जाए उस पर समय से पहले पूर्ण विराम लगाने पर काम किया जाता है। 2024 लोकसभा चुनाव मोदी का मकसद नही है। मोदी की योजना में भविष्य का सम्रद्ध और विकसित भारत बनाना है। पार्टी बीच की किसी भी रूकावट को बर्दाश्त करके नही चलना चाहती है। चाहे मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ या राजस्थान हो.. यहां मोदी के नाम पर तीनों प्रदेश में चुनाव लड़े गए। बीजेपी को मिली प्रचंड जीत में किसी दूसरे की प्रसिद्धि पर विराम पार्टी में बगावती विरोध को दबाने की कवायत रही है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इसे भांप चुके थे। उन्होंने गलतियां सुधारने की तरफ प्रयास करना शुरू किए। पर कहीं न कहीं अहम का टकराव होता रहा। जिसे मोदी से जुड़ी टीम नॉट कर रही थी। यहां हम ज्योतिरादित्य सिंधिया का जिक्र करेंगे। एक प्रभावी चेहरा, बहुत अच्छे वक्ता, साथ ही संगठित करने की क्षमता को उन्होंने साबित किया है। कांग्रेस से बीजेपी में आने के कारणों को उन्होंने मोदी के सामने खुलकर रखा। बीजेपी में आने के बाद उन्होंने संगठन सर्वोपरि मानकर काम किया। कोई ऐसी लाइन जो इससे बाहर जाती है वो सिंधिया ने नही खींची। जब इन्हें जांचा परखा गया। ये हर कसौटी पर खरे उतरते चले गए। न इन्होंने अपनी बुआ बसुंधरा राजे जैसे बाहर जाकर काम किया। सिंधिया हकीकत समझते हैं। उसी का परिणाम है जहां मंत्री मंडल विस्तार में उनसे जुड़े विधायकों को जगह मिलने जा रही है। सरकार गठन के बाद आलाकमान ने इनके महत्व को लेकर सीएम मोहन यादव को आभास कराया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह , वसुंधरा राजे और रमन सिंह द्वारा खुद से खींची लाइन उन्हें नुकसान पहुंचाने का काम कर रही है। ज्योतिरादित्य समझते हैं मोदी के अंश बनकर अच्छे से काम किया जा सकता है। मोदी मिशन के साथ पार्टी कैसे जीते इसका खाका बनाकर भारतीय जनता पार्टी संगठित होकर आगे बढ़ना चाहती है। जो खुद की लाइन खींचेगा। उसे दरकिनार किया जाता रहेगा। मोदी ने बीजेपी को अपनी माँ , आत्मा अपना सब कुछ पार्टी पर न्यौछावर होने की बात कही है। जो इसमे समाहित है वह मोदी का है। मोदी यानी भारतीय जनता पार्टी। उनके कदमताल करते चलने में सब राह आसान है। जो इससे आगे सोचेगा वो खुद से नुकसान उठाने का जिम्मेदार माना जाएगा।

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