कलेक्टर के निर्देश बेअसर, प्राइवेट स्कूलों की पकड़ बरकरार, जिस दुकान पर अभिभावकों की भीड़, वहीं मालिक के व्यवहार पर उठे गंभीर सवाल
सागर । जमीनी पड़ताल
सागर में नए शैक्षणिक सत्र से पहले प्रशासन ने अभिभावकों को राहत देने के उद्देश्य से पुस्तक मेले का आयोजन किया। दावा किया गया कि यहां कॉपी-किताबों और स्टेशनरी पर अच्छा-खासा डिस्काउंट मिलेगा, जिससे अभिभावकों को महंगाई से राहत मिलेगी।
लेकिन जब इस व्यवस्था की जमीनी हकीकत देखी गई, तो तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आई।
एक तरफ मेला, दूसरी तरफ ‘तय दुकान’ पर भीड़
जहां एक ओर मेले में छूट का प्रचार हो रहा है, वहीं सिविल लाइन स्थित दीपक स्टेशनरी पर अभिभावकों की भारी भीड़ उमड़ती दिखाई दी।
दुकान के बाहर लंबी लाइनें, सड़क तक खड़े लोग, अंदर जगह नहीं, बाहर से ही सामान का वितरण, यह नजारा साफ बताता है कि असली खरीदारी वहीं हो रही है, जहां स्कूलों ने संकेत दिए हैं।
यानी, अभिभावक आज भी स्वतंत्र नहीं हैं, वे मजबूरी में “तय दुकानों” से ही खरीदारी कर रहे हैं।
प्राइवेट स्कूलों का दबाव?
अभिभावकों का साफ कहना है कि स्कूलों द्वारा दी गई लिस्ट में खास दुकानों का अप्रत्यक्ष दबाव होता है।
दूसरी जगह से सामान लेने पर असुविधा या अप्रत्यक्ष आपत्ति जताई जाती है। कई बार कॉपियों पर स्कूल का मोनोग्राम भी रहता है। नतीजा छूट होने के बावजूद मेला बेअसर और महंगी खरीदारी जारी है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई गंभीरता
इसी बीच, इसी स्टेशनरी से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
वीडियो में दुकान संचालक का एक छात्रा के प्रति व्यवहार सामान्य नहीं, बल्कि असहज और सवाल खड़े करने वाला नजर आता है।
वीडियो में दिखने वाले बिंदु…
छात्रा को देखने का तरीका असामान्य प्रतीत होता है
हाव-भाव और बॉडी लैंग्वेज सहज नहीं लग रही है
छात्रा के साथ नजदीकी व्यवहार को लेकर सवाल उठते हैं
यह वही जगह है, जहां रोज बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पहुंच रही हैं।
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बड़ा सवाल: क्या बच्चे सुरक्षित हैं?
अब मामला सिर्फ महंगी किताबों तक सीमित नहीं रहा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन दुकानों से खरीदारी “अनिवार्य” कराई जा रही है, क्या वे बच्चों के लिए सुरक्षित हैं?
क्या इन दुकानों के व्यवहार और माहौल की कोई जांच होती है? क्या स्कूल सिर्फ आर्थिक पहलू देख रहे हैं?
कलेक्टर के निर्देश बेअसर
प्रशासन द्वारा पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि किसी एक दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा और अभिभावकों को विकल्प मिलेगा।
लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग है “तय दुकानों” पर भीड़, मेले की छूट बेअसर, और अब उसी व्यवस्था से जुड़े स्थान पर संदिग्ध व्यवहार का वीडियो सामने आना, यह सीधे-सीधे प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी को दर्शाता है।
अभिभावकों की दोहरी चिंता है। पहले महंगी किताबें और अनावश्यक लिस्ट, और अब बच्चों की सुरक्षा, क्या यह एक बड़ा सिस्टम फेलियर है? पूरा मामला अब तीन स्तर पर सवाल खड़े कर रहा है। शिक्षा व्यवस्था, जहां किताबें भी नियंत्रण में हैं
व्यापार व्यवस्था, जहां सीमित दुकानों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था, जहां बच्चों की गरिमा पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन को चाहिए कि इस वीडियो की निष्पक्ष जांच हो, संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की जाए। “तय दुकानों” की व्यवस्था की समीक्षा हो। स्कूलों की भूमिका की जांच की जाए। क्योंकि सागर में अब शिक्षा सिर्फ महंगी नही बल्कि सवालों के घेरे में है। यहां अभिभावक सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं।











