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बांसाकलां (दमोह) की माटी से भोपाल मंत्रालय तक.. असाधारण संकल्प से MPPSC महिला वर्ग में टॉप करने वाली अवर सचिव वंदना राजपूत का यह सफर, हर बेटी को देगा संबल

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दमोह/सागर। प्रशासनिक सेवाओं में सफलता केवल एक पद की प्राप्ति नहीं, बल्कि निरंतर परिश्रम, अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने की क्षमता का प्रमाण है। बुंदेलखंड के दमोह जिला से करीब 10 किलोमीटर दूर गाँव बांसाकलां से निकलकर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) में शीर्ष स्थान अर्जित करने वाली वंदना राजपूत की प्रशासनिक यात्रा इसका एक जीवंत उदाहरण है।

पूरे मध्य प्रदेश के महिला वर्ग में प्रथम स्थान हासिल करने वाली वंदना राजपूत की यह कहानी ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शिका है। उन्होंने न केवल इस कठिन परीक्षा में अपनी श्रेष्ठता साबित की, बल्कि एक बेहद चुनौतीपूर्ण व्यक्तिगत समय में भी अपनी कर्तव्यनिष्ठा और एकाग्रता को बनाए रखा। आज वे अपनी योग्यता और प्रशासनिक दक्षता के बल पर मध्य प्रदेश शासन के सबसे महत्वपूर्ण विभाग में एक जिम्मेदार भूमिका निभा रही हैं।

कठिन समय में असाधारण मानसिक दृढ़ता का परिचय
वंदना की सिविल सेवा की यह यात्रा कड़े संघर्षों और ऊंचे सिद्धांतों से निर्मित हुई है। उन्होंने इस परीक्षा के लिए वर्षों तक गंभीर अध्ययन किया। जब वे इस परीक्षा के अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव यानी साक्षात्कार के चरण में थीं, ठीक उसी समय उनके परिवार को एक अत्यंत दुखद दौर से गुजरना पड़ा और उनकी पूजनीय माता जी का आकस्मिक निधन हो गया।

किसी भी परीक्षार्थी के लिए यह समय अत्यधिक मानसिक और भावनात्मक रूप से विचलित करने वाला समय था। इस अपूरणीय निजी क्षति के कारण उस वर्ष वे अंतिम चयन सूची में अपना स्थान सुरक्षित नहीं कर सकीं। परंतु, वंदना ने इस कठिन दौर में अद्भुत संयम और धैर्य का परिचय दिया। उन्होंने अपनी इस व्यक्तिगत क्षति को अपने संकल्प में बाधक नहीं बनने दिया, बल्कि अपनी पूज्य माता जी के सपनों को पूरा करने के लिए पुनः दोगुनी ऊर्जा के साथ अध्ययन में जुट गईं।

ऐतिहासिक सफलता, 1563 अंकों के साथ सूबे में किया टॉप..
कठिन परिस्थितियों के बीच अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने का परिणाम अंततः ऐतिहासिक रहा। अगले ही प्रयास में वंदना राजपूत ने कुल 1563 अंक अर्जित कर समूचे मध्य प्रदेश के महिला वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल किया और सीधे डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुईं।

एक सेवानिवृत्त शिक्षक पिता रघुवीर सिंह राजपूत की सबसे छोटी बेटी ने जब इस गौरवमयी मुकाम को हासिल किया, तो पूरा बांसाकलां गाँव और दमोह जिला गौरव के अहसास से सराबोर हो उठा। भाई-बहनों में सबसे छोटी वंदना ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य के प्रति निष्ठा सच्ची हो और एकाग्रता भंग न हो, तो किसी भी परिवेश से निकलकर सर्वोच्च मुकाम पाया जा सकता है।

प्रशासनिक दक्षता से बनीं शासन की भरोसेमंद अधिकारी…
वंदना राजपूत की मध्य प्रदेश शासन के नीति-निर्धारक और शीर्ष प्रशासनिक गलियारों तक पहुँचने की यात्रा उनके कड़े नियमों, अनुशासन और उत्कृष्ट कार्यशैली का परिणाम है। उनके अब तक के करियर ग्राफ को मुख्य रूप से तीन चरणों में देखा जा सकता है, जो उनकी प्रशासनिक परिपक्वता को दर्शाते हैं

जमीनी प्रशासनिक अनुभव (डिप्टी कलेक्टर)
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वंदना राजपूत ने मैदानी स्तर (Field Postings) पर काम किया। इस दौरान उन्होंने राजस्व मामलों के पारदर्शी निपटारे, कानून व्यवस्था को बनाए रखने और सीधे आम जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी संवेदनशीलता और नियमों के दायरे में रहकर त्वरित फैसले लेने की क्षमता से सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

कलेक्ट्रेट स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी (संयुक्त कलेक्टर – सीहोर)
मैदानी स्तर पर उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और विषम परिस्थितियों में प्रशासनिक सुशासन को बनाए रखने की क्षमता को देखते हुए मध्य प्रदेश शासन ने उन्हें सीहोर जिले में संयुक्त कलेक्टर (Joint Collector) की अहम जिम्मेदारी सौंपी। सीहोर में रहते हुए उन्होंने लोक सेवा गारंटी के मामलों के त्वरित निराकरण और जिले के विभिन्न विभागों के बीच बेहतरीन समन्वय (Coordination) स्थापित किया, जिससे जिला प्रशासन में उनकी पहचान एक कार्यकुशल अधिकारी के रूप में सुदृढ़ हुई।