मिडिल ईस्ट इस समय बेहद खतरनाक दौर से गुजर रहा है और हालात तेजी से युद्ध की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। Iran ने साफ शब्दों में ऐलान कर दिया है कि वह अब किसी भी दबाव या धमकी के बीच कोई बातचीत नहीं करेगा।
ईरान का कहना है कि जब तक United States और Israel हमले और दबाव की नीति जारी रखेंगे, तब तक किसी भी तरह की वार्ता संभव नहीं है। साथ ही ईरान ने अस्थायी सीजफायर को ठुकराते हुए “स्थायी शांति” की शर्त रख दी है।
उधर, Donald Trump ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने समझौता नहीं किया, तो उसे “भारी परिणाम” भुगतने होंगे। ट्रंप ने यहां तक कहा कि मौजूदा हालात में “एक पूरी सभ्यता खत्म होने की कगार पर पहुंच सकती है।”
जमीन पर हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं ईरान भी इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमलों की तैयारी में जुटा है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ईरान ने संकेत दिए हैं कि अगर उस पर दबाव और बढ़ा, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित कर सकता है। यह रास्ता दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है, और यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक आर्थिक संकट को जन्म दे सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 7–10 दिन बेहद निर्णायक साबित होंगे। इस दौरान या तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप बढ़ेगा और हालात को नियंत्रित किया जा सकेगा, या फिर यह टकराव एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।
भारत पर असर
अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी, शेयर बाजार में गिरावट और मिडिल ईस्ट में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा चिंता का विषय बन सकती है।
फिलहाल दुनिया एक बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ी है। दोनों पक्षों की कड़ी चेतावनियों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। अब सबकी नजरें अगले कुछ दिनों पर टिकी हैं जहां एक फैसला दुनिया को शांति की ओर ले जा सकता है या फिर एक बड़े विनाश की तरफ चला जाएगा।












