सागर। पुलिस महकमे में कुछ थाने केवल अपने क्षेत्रफल के कारण नहीं, बल्कि अपने व्यापक भूगोल, आर्थिक मलाई और रसूख की रस्साकशी के कारण पूरे संभाग में सबसे भारी माने जाते हैं। सागर संभाग (Division) का मोतीनगर पुलिस थाना इसी श्रेणी का वह सर्वोच्च सिंहासन है, जिसे महकमे के भीतर गोल्ड यानी सोने की खदान कहा जाता है।
सागर जिले में पैर रखने वाले हर तेज-तर्रार निरीक्षक (TI) का एक ही ख्वाब होता है, चाहे जो हो जाए, एक बार मोतीनगर की कमान मिल जाए। लेकिन इस गोल्ड दर्जे की चमक और इसके संभाग में सबसे चर्चित होने के पीछे कई ऐसे छिपे हुए भौगोलिक, आपराधिक और प्रशासनिक सच हैं, जिनका भंडाफोड़ होना जरूरी है। आइए, इस पूरे खेल का सिलसिलेवार विश्लेषण करते हैं।
सट्टा, जुआ और अनैतिक गतिविधियों का संभाग स्तरीय हब..
मोतीनगर थाना क्षेत्र सिर्फ पारंपरिक अपराधों का ही नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के हाई-टेक सट्टे, संगठित जुए और अनैतिक धंधों का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। इस क्षेत्र में हुए बड़े खुलासे इसके गवाह हैं।
अंतर्राज्यीय ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट (छत्तीसगढ़-दुबई लिंक).. मोतीनगर थाना पुलिस द्वारा शनिश्चरी चौकी और बीजासेन मंदिर जैसे इलाकों में की गई बड़ी कार्यवाहियों में अंतर्राज्यीय सट्टा रैकेट का पर्दाफाश हो चुका है। थाना प्रभारी जसवंत सिंह राजपूत की मौजूदगी में पकड़े गए गिरोहों के तार छत्तीसगढ़ के भिलाई, महाराष्ट्र के ठाणे और सीधे दुबई से जुड़े पाए गए। ये सटोरिए महादेव ऐप और बुक डॉट लाइव (Book.live) जैसे अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स के जरिए करोड़ों रुपये का टर्नओवर संभाल रहे थे। पुलिस ने इनके पास से दर्जनों एटीएम, बैंक खाते और करोड़ों के वित्तीय लेनदेन के दस्तावेज जब्त किए थे।
राशन दुकान की तर्ज पर सट्टा और थानों का गठजोड़…
स्थानीय सूत्रों और दैनिक भास्कर की खोजी रिपोर्ट (इन्वेस्टिगेशन) के मुताबिक, मोतीनगर थाना क्षेत्र के भगवानगंज और बड़ा बाजार जैसे इलाकों में राशन दुकान की तर्ज पर खुलेआम सट्टा बुकिंग केंद्र संचालित होते आए हैं। इस जांच रिपोर्ट में शहर के थानों की इन अवैध धंधों के साथ संदिग्ध संलिप्तता और मूक सहमति का भंडाफोड़ कैमरे पर किया गया था, जिसने पूरे सागर पुलिस महकमे की साख को हिलाकर रख दिया था।
सट्टा किंग भरत सोनी कनेक्शन..
इसी थाना क्षेत्र से जुड़े बड़ा बाजार निवासी सट्टा किंग भरत सोनी के नेटवर्क का जब खुलासा हुआ था, तो पुलिस ने ₹24,70,000 की नगद रकम और सट्टे की करोड़ों की बुकिंग के हिसाब-किताब वाले रजिस्टर बरामद किए थे, जिसने साबित किया था कि इस मलाईदार इलाके में काली कमाई की जड़ें कितनी गहरी हैं।
तीन नेशनल हाईवे का ट्रिपल जंक्शन और संदिग्ध व्यापार का रूट..
मोतीनगर थाना क्षेत्र का भौगोलिक दायरा इसे पूरे संभाग का सबसे रणनीतिक और संवेदनशील इलाका बनाता है
इस थाना क्षेत्र की सीमाओं से NH-86 (सागर-कानपुर), NH-26 (झांसी-लखनादौन फोरलेन) के हिस्से और खुरई-बीना जैसे मुख्य मार्ग गुजरते हैं। यह क्षेत्र एक तरह से तीन बड़े सड़क मार्गों का ट्रिपल जंक्शन है।
सप्लाई लाइन और संदिग्ध परिवहन..
उत्तर प्रदेश (UP) की सीमाओं और अन्य बड़े जिलों से जुड़ने वाले इन राजमार्गों के कारण यह पूरा थाना क्षेत्र संदिग्ध और अवैध माल के परिवहन का मुख्य रूट माना जाता है। रात के अंधेरे में बिना पक्के बिल के सोने-चांदी की खेप, हवाला का कैश, मादक पदार्थों और अवैध परिवहन की आशंका यहां हमेशा बनी रहती है। राजमार्गों पर होने वाली इसी अघोषित गतिविधियों पर नजर रखने के कारण इस थाने का आर्थिक रसूख आसमान छूता है।
अपराध का हॉटस्पॉट, संवेदनशील क्षेत्र..
यह थाना क्षेत्र अपराध के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। यहां मोबाइल और वाहन चोरी जैसे छोटे अपराधों से लेकर, सरेराह चाकूबाजी, मर्डर, और सर्राफा व्यापारियों के कर्मचारियों के साथ ज्वेलरी लूट की बड़ी साजिशें सामने आ चुकी हैं। करोड़ों के लेनदेन वाले इस बाज़ार में अपराधियों की यह सक्रियता पुलिस की गश्त, खुफिया तंत्र और रात की निगरानी पर लगातार गंभीर सवालिया निशान लगाती है, जिससे स्थानीय मीडिया में यह थाना हमेशा शीर्ष पर बना रहता है।
क्यों कहा जाता है इसे सागर का गोल्ड और क्रीमी थाना?
मोतीनगर थाने को गोल्ड का तमगा महकमे ने ऐसे ही नहीं दिया, इसके पीछे अरबों रुपये के व्यापारिक सिंडिकेट का सीधा जुड़ाव है
बिना बिल के सोने का अवैध खेल की सच्चाई..
इस थाने के अधिकार क्षेत्र में सागर का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र बड़ा बाजार और सर्राफा बाजार आता है। यहां रोजाना अरबों रुपये के सोने-चांदी का लेनदेन होता है। यहां ऐसे आरोप लगते रहते हैं कि व्यापार की आड़ लेकर बड़े पैमाने पर दो नंबर (बिना पक्के बिल) के सोने का काला कारोबार फलता-फूलता है। इस टैक्स चोरी और अवैध परिवहन को मिलने वाले कथित अभयदान के बदले जो परदे के पीछे का कमीशन तंत्र काम करता है, उसी वजह से इस थाने की कुर्सी सबसे मलाईदार मानी जाती है।
भोपाल की लिंक और रसूखदारों की लॉबिंग… सीधे टीआई के लिए नो एंट्री ?
मोतीनगर थाने की कप्तानी पाना किसी सीधे-सादे या लूप-लाइन के निरीक्षक के बस की बात नहीं है। ऐसा माना जाता है इस थाने का प्रभार हमेशा उस टीआई को मिलता आया है जिसकी भोपाल स्तर (मंत्रालय और पीएचक्यू) पर तगड़ी राजनीतिक सिफारिश हो। जो जिले के वर्तमान पुलिस कप्तान (SP) के सबसे खास स्क्वाड या रणनीतिक टीम का मुख्य चेहरा हो।
महकमे में यह बात खुली किताब की तरह है कि इस मलाईदार थाने की पोस्टिंग पाने के लिए निरीक्षक सोर्स और रसूखदार नेताओं की लॉबिंग का इस्तेमाल करते हैं। जो टीआई यहां बैठता है, उसे कहा जाता है कि वह खुद को जिले का अघोषित छोटा कप्तान समझने लगता है। लेकिन यही अति-उत्साह और रसूख कई बार उनके पूरे करियर को निगल जाता है।
तीखे प्रमाण और ऑन-रिकॉर्ड खुलासे जब मुल्जिम बनी पुलिस..
यह खोजी रिपोर्ट किसी कयास पर नहीं, बल्कि ऑन-रिकॉर्ड दस्तावेजों और निलंबन आदेशों पर आधारित है
नाली में खुद चाकू रखकर फर्जी जब्ती का खेल (ताजा तरीन मामला)
मध्य प्रदेश पुलिस का ऐसा शर्मनाक कारनामा सामने आया है, जिससे माननीय हाई कोर्ट भी सन्न रह गया।
मोतीनगर पुलिस ने इतवारी टौरी निवासी रज्जू उर्फ सुंदर साहू और उसके परिवार पर हत्या के प्रयास (धारा 307) का फर्जी मामला दर्ज किया। आरोपी ने घटना के वक्त बाघराज मंदिर में होने के पुख्ता सीसीटीवी फुटेज दिए, लेकिन रसूखदारों के दबाव में पुलिस ने उसे जेल भेज दिया।
कोर्ट में केस मजबूत करने के लिए मोतीनगर पुलिस के जांबाज अधिकारियों ने अपनी केस डायरी में लिखा कि आरोपी की निशानदेही पर हमले में प्रयुक्त चाकू नाली से जब्त किया गया है।
पुलिस यह भूल गई कि ठीक सामने की दुकान का सीसीटीवी चालू था। फुटेज में साफ दिखा कि पुलिसकर्मियों ने स्वयं नाली में चाकू रखा और फिर उसे ढूंढने का ढोंग रचा। हाई कोर्ट के सामने जब यह सुबूत आया, तो जज साहब ने तीखी फटकार लगाई। नतीजतन, उपनिरीक्षक (SI) और आरक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए।
महा-चर्चित चांदी कांड – तत्कालीन टीआई सतीश सिंह सहित 7 पुलिसकर्मी सस्पेंड..
यह मोतीनगर थाने के इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक निलंबन था, जिसकी गूंज तत्कालीन गृहमंत्री तक को हिला गई थी।
तत्कालीन मोतीनगर थाना प्रभारी (TI) सतीश सिंह और उनके चहेते एसपी स्क्वाड के छह सिपाहियों ने मालथोन चेक पोस्ट पर अपने थाना क्षेत्र की सीमा लांघकर एक सफेद कार को रोका था।
कार में करोड़ों रुपये मूल्य की अवैध चांदी तस्करी कर ले जाई जा रही थी (जो इसी हाईवे रूट से होकर गुजर रही थी)। आरोप लगे कि इतनी बड़ी खेप को ऑन-रिकॉर्ड जब्त करने के बजाय, परदे के पीछे बड़ा आर्थिक लेनदेन (सेटिंग) कर कार और आरोपियों को रफा-दफा कर दिया गया।
जब इस संदेहास्पद चेकिंग का वीडियो लीक होकर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो तत्कालीन एसपी तरुण नायक ने स्वतः संज्ञान लिया। पुलिस की छवि धूमिल होने के चलते तत्कालीन टीआई सतीश सिंह समेत आरक्षक हेमंत ठाकुर, अमित चौबे, मुकेश जाटव, प्रदीप शर्मा, आशीष गौतम और मनीष तिवारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर लाइन हाजिर किया गया था।
पुलिस प्रताड़ना और मोबाइल टावर का हाई-वोल्टेज ड्रामा..
मोतीनगर पुलिस पर अक्सर रसूखदार व्यापारियों के इशारे पर कमजोर और गरीब तबके को प्रताड़ित करने के आरोप लगते रहे हैं।
थाना क्षेत्र के ही एक पीड़ित युवक और उसके परिवार को जब पुलिस ने रसूखदारों के दबाव में आकर बेरहमी से पीटा और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी, तो थाने में उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
न्याय न मिलने से हताश होकर वह युवक अपने पूरे परिवार के साथ शहर के एक हाई-वोल्टेज मोबाइल टावर पर चढ़ गया। कई घंटों तक चले इस ड्रामे ने पूरे सागर प्रशासन और पुलिस के हाथ-पांव फुला दिए थे। इसके बाद भी तत्कालीन कप्तान को मामले को दबाने के लिए दोषी स्टाफ के खिलाफ विभागीय जांच (DE) बैठानी पड़ी थी।
गोल्ड की चमक या करियर का ग्रहण?
इन प्रामाणिक तथ्यों, इसके विशाल राजमार्ग नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय महादेव ऐप और ऐसे अन्य सट्टा सिंडिकेट और संवेदनशील अपराध रिकॉर्ड से साफ है कि सागर का मोतीनगर थाना पुलिस के लिए जितना क्रीमी और आकर्षक है, उतना ही यह अधिकारियों के करियर के लिए सबसे बड़ा डेन्जर ज़ोन भी है। सोने की अवैध चमक, सट्टे की काली कमाई, हाईवे से गुजरने वाला संदिग्ध माल, सरेराह होने वाली आपराधिक वारदातें और रसूखदारों से साठगांठ का यह खेल जब-जब मर्यादा पार करता है, तब-तब इस गोल्ड थाने के कप्तानों की वर्दी पर ऐसे दाग लगते हैं जो कोर्ट की फटकार और सस्पेंशन के काले आदेशों के साथ इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं।






