सागर का बड़ा बाजार.. जनता की व्यवस्था पर सवाल या विधायक शैलेन्द्र जैन की अनदेखी?
सागर के बड़ा बाजार क्षेत्र का एक वीडियो वायरल है, जिसमें विधायक शैलेन्द्र जैन ट्रैफिक संभालते नजर आते हैं। लेकिन यह दृश्य जितना सतही तौर पर सराहनीय दिखता है, उतना ही गहरा सवाल भी खड़ा करता है क्या चार बार से विधायक रहे शैलेन्द्र जैन अब तक अपने ही क्षेत्र की जनता के मर्म और उनकी असाधारण क्षमता को नहीं समझ पाए?
बड़ा बाजार सागर की सबसे पहली बसाहटों में से एक है। संकरी सड़कें, बढ़ता ट्रैफिक दबाव और वर्षों पुरानी समस्या ये सब कोई नई बात नहीं है। लेकिन इतने समय में इस समस्या से स्थायी निजात दिलाने के लिए कोई बड़ा और ठोस बदलाव नजर नहीं आता। अगर व्यवस्था मजबूत होती, तो क्या यहां रोज सैकड़ों बार जाम की स्थिति बनती?
जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। यहां का ट्रैफिक किसी सरकारी सिस्टम से ज्यादा, जनता के अनुभव और आपसी तालमेल से चलता है। बड़ा बाजार क्षेत्र और यहां से गुजरने वाले राहगीर खुद इस पूरे रास्ते का ट्रैफिक संभालते हैं। कई बार ट्रैफिक पुलिस भी इन्हीं के सहयोग से जाम खुलवा पाती है क्योंकि हर जगह एक साथ संभालना संभव नहीं होता।
यहां एक संगठित “चेन सिस्टम” काम करता है। जैसे ही जाम लगता है, लोगों को अपने-आप समझ आ जाता है कि क्या करना है। बिना किसी निर्देश के सब अपनी भूमिका निभाने लगते हैं।
जब मुख्य सड़क पर जाम बढ़ता है और रास्ता बंद होने लगता है, तो सड़क के किनारे मोहल्लों के रास्ते सक्रिय हो जाते हैं। टू-व्हीलर वाहन इन रास्तों से निकलकर मुख्य मार्ग का दबाव कम करते हैं। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि टू-व्हीलर लगातार चलते रहें, इसलिए लोग रास्ता बनाते रहते हैं।
वहीं, फोर-व्हीलर वाहन अगर जाम का कारण बनते हैं, तो उन्हें इस तरह रोका जाता है कि वे अपनी लेन बनाए रखें और छोटे वाहन निकलते रहें। यह सब बिना किसी औपचारिक आदेश के, सिर्फ समझ और अनुभव के आधार पर होता है।
ऐसे में जो टू-व्हीलर चालक “रॉन्ग साइड” जाता दिखता है, वह अव्यवस्था नहीं, बल्कि इसी स्थानीय सिस्टम का हिस्सा होता है। उसे पता होता है कि अगर वह रुक गया तो जाम और बढ़ेगा इसलिए वह जहां जगह मिले, आगे बढ़ता रहता है, ताकि ट्रैफिक का प्रवाह बना रहे।
सोचिए, अगर यहां के लोग यह सब खुद से संभालने में सक्षम न होते तो क्या होता? सागर का यह सबसे व्यस्त इलाका पूरी तरह ठप हो जाता। लेकिन ऐसा नहीं होता, क्योंकि यहां की जनता ने समस्या को अपना भाग्य मानकर सिर्फ सहा नहीं, बल्कि हर दिन उससे लड़ना और उसे संभालना सीख लिया है।
यही वह काबिलियत है, यही वह जमीनी समझ है, जिसे पहचानने की जरूरत है। लेकिन सवाल यही है, क्या विधायक शैलेन्द्र जैन इस सच्चाई को समझ पा रहे हैं? क्या वे उस जनता की इस अनकही मेहनत और व्यवस्था को देख पा रहे हैं, जो बिना किसी श्रेय के शहर को रोज चलाती है?
वायरल वीडियो एक पल दिखाता है, लेकिन बड़ा बाजार की सच्चाई हर दिन लिखी जाती है, जनता के धैर्य, समझ और संघर्ष से। सवाल यह नहीं है कि उस दिन ट्रैफिक किसने संभाला, सवाल यह है कि इतने वर्षों में इस समस्या से स्थायी राहत दिलाने की दिशा में क्या किया गया?
सागर का बड़ा बाजार आज भी चल रहा है, किसी व्यवस्था के भरोसे नहीं, बल्कि उस जनता के भरोसे, जिसने अव्यवस्था में भी रास्ता बनाना सीख लिया है।











